स्मृतियों को सहजने का एक प्रयास

चुर्नी तवा डैम की यादगार महुआ यात्रा

कुछ यात्राएँ वक़्त के साथ और भी मीठी हो जाती हैं – और अगर उसमें महुआ की खुशबू भी घुली हो, तो बात ही कुछ और होती है!
हम दोस्तों की टोली पहुँची थी चुर्नी तवा बांध की ओर। साथ थी महुआ की बोतल, दिलों में उमंग और होंठों पर गीत। हँसी, मस्ती, और झूमती आवाज़ें उस दिन की हवा में घुल गई थीं।
हमारे प्रमोद भैया उस दिन पूरे फॉर्म में थे – जैसे हर गीत उन्हीं के लिए बना हो। बोतल सामने रखी थी, और दिल बिलकुल खुले हुए।
अब जब उन लम्हों की तस्वीरें फिर से देखता हूँ, तो लगता है – असली सुख बस सादगी और दोस्ती में ही छुपा है।







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