🌿एक प्रेरक मुलाकात:श्री आलोक शुक्ला-हसदेव अरण्य के रक्षक 🌿
📅 दिनांक: 13 जून 2025
यह दिन मेरे जीवन के सबसे प्रेरणादायक क्षणों में से एक था। मेरे मित्र अजय राउत जी के साथ मुझे 2025 के गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार विजेता श्री आलोक शुक्ला जी से मिलने और उनके संघर्ष की कहानी सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
🌲 हसदेव अरण्य: छत्तीसगढ़ के फेफड़े
657 वर्ग मील में फैला हसदेव अरण्य भारत के जैव विविधता से समृद्ध वन क्षेत्रों में से एक है। यह क्षेत्र:
- 50+ लुप्तप्राय हाथी और बाघों का आवास है।
- 25 से अधिक संकटग्रस्त प्रजातियाँ जैसे तेंदुआ, स्लॉथ भालू, भेड़िए यहाँ रहते हैं।
- 92 पक्षी प्रजातियाँ और 167 औषधीय पौधों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
- यह हसदेव नदी का जलग्रहण क्षेत्र है, जो 7.41 लाख एकड़ कृषि भूमि को सिंचित करता है।
⚠️ कोयला खनन का खतरा
इस क्षेत्र के नीचे 5.6 बिलियन टन कोयला मौजूद है, जिससे यह खनन कंपनियों के लिए आकर्षक बन गया है। भारत की 70% बिजली कोयले से उत्पन्न होती है और छत्तीसगढ़ इसका बड़ा स्रोत है।
👨🌾 आलोक शुक्ला: एक स्वाभाविक नेता43 वर्षीय श्री आलोक शुक्ला छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन और हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक हैं। उन्होंने आदिवासी समुदायों को कानूनी अधिकारों और पर्यावरणीय शिक्षा से सशक्त किया।
📜 संघर्ष की प्रमुख घटनाएँ
- 2012: संघर्ष समिति की स्थापना
- 2020: कोविड के बावजूद गांवों को संगठित करना शुरू किया
- सितंबर 2020: 3 कोयला खदानों को सरकार ने वापस लिया
- अक्टूबर 2021: 500 ग्रामीणों के साथ 166 मील की पैदल यात्रा, 14 खदानें रद्द
- जुलाई 2022: कुल 21 कोयला ब्लॉकों की रद्दीकरण घोषणा – 4.45 लाख एकड़ वन सुरक्षित"
सोशल मीडिया पर #SaveHasdeo एक जन आंदोलन बन गया। लोगों ने बाइक रैलियों, पोस्टर्स, शादी के निमंत्रणों में इस हैशटैग का प्रयोग कर समर्थन जताया।
🌟 निष्कर्ष
आलोक जी का संघर्ष दर्शाता है कि जब नागरिक संगठित होते हैं, तो सबसे शक्तिशाली कॉर्पोरेट और सरकारी नीतियों को भी चुनौती दी जा सकती है। उनका साहस हमें प्रेरणा देता है कि हम भी अपने पर्यावरण के प्रहरी बन सकते हैं।
✅ आप क्या कर सकते हैं?
👉 सोशल मीडिया पर #SaveHasdeo का प्रयोग करें
👉 अपने स्थानीय समूहों में जागरूकता फैलाएँ
🌿 आलोक जी, आपका संघर्ष हम सबके लिए प्रेरणा है। हम आपके साथ हैं! 🙏




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