स्मृतियों को सहजने का एक प्रयास

Saturday, June 21, 2025

। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस ।। - 21-06-2025

 

 

🌿✨ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2025 ✨🌿

"योगः कर्मसु कौशलम्" — गीता से जीवन का श्रेष्ठ संदेश

🙏 सादर वंदन, साथियों!

आज दिनांक 21 जून 2025 को हम सभी "टीम 🇮🇳 जय हिंद की सेना" के सदस्य समयानुसार ऋषि उद्यान पार्क में एकत्रित हुए और पूरे जोश, अनुशासन व श्रद्धा के साथ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आत्मिक और सामूहिक जागरण था — तन, मन और आत्मा को समर्पित।

🧘‍♂️ सत्र की शुरुआत सूर्य नमस्कार, प्राणायाम और योगासन से हुई।

🧘‍♀️ फिर 10 मिनट की "आना-पाना विपश्यना मेडिटेशन" के माध्यम से सभी को भीतर की ओर झाँकने का मार्ग दिखाया।

🌟 इस आयोजन की विशेष बात यह रही कि हमारे प्रिय मित्र श्री विवेक धीर जी ने, लॉन्ग डिस्टेंस से जुड़े रहकर हमें संबल और प्रेरणा दी।

 “ कुछ लोग दूर रहकर भी दिल के सबसे पास होते हैं – विवेक जी उन्हीं में से एक हैं। ”

उनकी उपस्थिति ने आज के दिन को और भी भावनात्मक और स्मरणीय बना दिया।


🌞 अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर एक विशेष स्नेहपूर्ण पहल 🌞

हमारे प्रिय मित्र संजय झा जी, जो स्वयं एक योग प्रशिक्षक (Yoga Teacher) हैं, आज योग दिवस के अवसर पर अनेक कार्यक्रमों में व्यस्त होने के बावजूद, उन्होंने हमारे लिए विशेष समय निकाला। 🙏

💫 उन्होंने सूर्य नमस्कार का एक मार्गदर्शक वीडियो हम सभी के साथ साझा किया है, ताकि हम सब इसे सही और प्रभावी ढंग से कर सकें। यह उनके गुरु-स्वरूप समर्पण और योग के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है।

🎥 कृपया आप सभी इस वीडियो को अवश्य देखें। इससे हमारी पूरी टीम को सूर्य नमस्कार सीखने और अभ्यास करने में बहुत सहायता मिलेगी।

संजय झा जी का हृदय से धन्यवाद और सादर अभिनंदन! 🌺 


🕉️ हमारा संकल्प

हम सभी ने आज यह संकल्प लिया कि —

 “अब से हम प्रतिदिन योग करेंगे, स्वस्थ रहेंगे और राष्ट्र को स्वस्थ रखने की दिशा में योगदान देंगे।”

“स्वस्थ व्यक्ति से ही स्वस्थ समाज और स्वस्थ भारत का निर्माण होता है।”

टीम जय हिंद की सेना की ओर से हम सभी मित्रों से अपील करते हैं —

🙏 योग करें, रोज करें, सच्चे आनंद से जुड़ें!

 

💫 योग का अर्थ — योगः कर्मसु कौशलम्

योग केवल शरीर को साधने का अभ्यास नहीं है, यह आत्मा को जाग्रत करने की विधि है।

"योगः कर्मसु कौशलम्" — अर्थात कुशलता पूर्वक किया गया हर कर्म योग बन जाता है।

योग हमें न केवल नैतिक और मानसिक रूप से परिपक्व करता है, बल्कि प्रभु से जुड़ने की साधना भी है।

> जब हमारी बुद्धि, आत्मा और शरीर – तीनों एक लक्ष्य की ओर कार्यरत होते हैं,

तब ही जीवन का असली विकास होता है — यही है वास्तविक योग।


🌸 समापन संदेश

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस केवल एक तारीख नहीं, बल्कि एक विचार है —

जिसे अपनाकर हम अपने जीवन को स्वस्थ, संतुलित और आत्मिक रूप से समृद्ध बना सकते हैं।

 

🌞 आज का दिन शुभ, स्वास्थ्यवर्धक और आत्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो!

जय हिंद